Posts

Showing posts from June, 2020

सतगुरु व भगवान में अंतर

Image
आज हम जानेंगे कि गुरु को भगवान क्यों मानना चाहिए? परमात्मा कबीर परमेस्वर जी ने कहा हैं-:  गुरु गोविंद दोउ खड़े, किसके लागू पाव । बलहरी गुरु आपने, गोविंद दिया मिलाय। अर्थात:- स्वयं पूर्ण परमात्मा ने सतगुरु की महिमा बताते हुए कहा है की सतगुरु वह है जिसने सत भक्ति के द्वारा हमें पूर्ण परमात्मा की प्राप्ति व मोक्ष का मार्ग बताया ।वह हमारे लिए भगवान  से भी ज्यादा आदरणीय है Santrampalji कबीर ,सतगुरु भक्ति मुक्ति के दानी ,सतगुरु बिना न छूटे खानी। सरलार्थ:- सतगुरु भक्ति कराकर मुक्ति प्रदान करते हैं वे भक्ति व मुक्ति के दाता हैं सतगुरु के बिना 4 खानी( जिसमें हम जन्मते हैं वह मरते हैं) का यह चक्र नहीं छूटता Santrampalji कबीर गुरु भक्ता मम आतम सोई। वाक़े हृदय रहूं समोई ।। अड़सठ तीर्थ भ्रम भ्रम आवे। सो फल गुरु के चरणों पावे। सरलार्थ:- परमात्मा ने स्वयं बताया है कि गुरु के भगत मेरी आत्मा है ओर  जो मेरे कृपा पात्र संत को गुरु बनाए हैं मैं उनके हृदय में रहता हूं और जो शिष्य अपने गुरु से अधिक किसी अन्य संत या भगत में आस्था रखता है तो उस पशु को कोई ज्ञान नहीं है क्यो...

जगन्नाथ मंदिर का रहस्य

Image
क्या आप जानते हैं जगन्नाथ का मंदिर किसने बनवाया? जगन्नाथ मंदिर जाने से पहले जानें यह रहस्य समुद्र बार बार जगन्नाथ मंदिर को तोड़ रहा था और विष्णु जी से प्रतिशोध ले रहा था। समुद्र ने कबीर परमात्मा से कहा कि जब यह श्री कृष्ण जी त्रेतायुग में श्री रामचन्द्र रूप में आया था तब इसने मुझे अग्नि बाण दिखा कर बुरा भला कह कर अपमानित करके रास्ता मांगा था। मैं वह प्रतिशोध लेने जा रहा हूँ। HistoryofJagannath  उड़ीसा में एक इंद्र दमन नाम का राजा था जो श्री कृष्ण जी का पुजारी था उसको स्वपन  में श्री कृष्ण जी ने दर्शन दिए और कहां इंद्र दमन एक मंदिर बनवा दे और जगन्नाथ नाम रख दे और ध्यान रहे उसमें कोई मूर्ति ना हो और उसमें एक विप्र छोड़ देना जो सद ग्रंथों का पाठ करें, कोई पाखंड पूजा मत करना इसमे । इंद्र दमन ने पांच बार मंदिर बनवाया लेकिन समुंदर ने तोड़ दिया , फिर छठी बार राजा इंद्र दमन ने अपनी पत्नी के गहनों से मंदिर बनवाया परमात्मा कबीर जी के कहने पर ,पहले चोरा बनवाया जो कबीर मठ के नाम से जाना जाता है परमात्मा कबीर परमेश्वर जी ने समुद्र को रोका। Historyofjagannath रथयात्रा 202...

krishna janmashtami

Image
भाद्रपद मास की अष्टमी तिथि को द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था इसलिए इस तिथि का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है। इस दिन हिंदू धर्म को मानने वाले लोग व्रत, पूजन और उत्सव मनाते हैं। लेकिन क्या आप जानते है कि श्री कृष्ण जी ने कभी नहीं कहा मेरी पूजा करो  श्री कृष्ण जी देवी-देवताओं की पूजा करने के पक्ष में नहीं थे जिस कारण से उन्होंने इंद्र की पूजा करने को मना किया था और  गोवर्धन पर्वत उठाया था इंद्र के प्रकोप से बचाने के लिए ब्रह्मा विष्णु महेश स्वयं तीन गुण  व तीन  देवता है जो अपनी पूजा के लिए नहीं कहते, वे तो पूर्ण परमात्मा की भक्ति के लिए कहते हैं Krishna janmashtami कृष्ण जी ने गोवर्धन उठाया ताकि हम इंद्र की न पूजा करके पूर्ण परमात्मा की पूजा करें । तीनों देवताओं से भी बड़े  पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी है राम तथा श्री कृष्ण जी ने भी गुरु बनाकर अपनी भक्ति की, मानव जीवन सार्थक किया । इससे सहज में ज्ञान हो जाना चाहिए कि अन्य व्यक्ति यदि गुरु के बिना भक्ति करता है तो कितना सही है ? अर्थात व्यर्थ हैं  Krishna janmashtami ...

Bible

Image
Bible  पवित्र बाईबल (उत्पत्ति ग्रन्थ) से सिद्ध होता है कि परमात्मा मानव सदृश शरीर में है, जिसने छः दिन में सर्व सृष्टी की रचना की तथा फिर विश्राम किया। उत्पत्ति ग्रन्थ 1:28 परमेश्‍वर ने उन्‍हें यह आशिष दी, ‘फलो-फूलो और पृथ्‍वी को भर दो, और उसे अपने अधिकार में कर लो। समुद्र के जलचरों, आकाश के पक्षियों और भूमि के समस्‍त गतिमान जीव-जन्‍तुओं पर तुम्‍हारा अधिकार हो।’ परमात्मा ने मांस खाने का आदेश नहीं दिया। मांस खाना परमेश्वर का आदेश नहीं ! पवित्र बाईबल (उत्पत्ति ग्रन्थ 1:29) प्रभु ने मनुष्यों के खाने के लिए जितने बीज वाले छोटे पेड़ तथा जितने पेड़ों में बीज वाले फल होते हैं वे भोजन के लिए प्रदान किए हैं, माँस खाना नहीं कहा है। हजरत ईसा मसीह की मृत्यु 30 वर्ष की आयु में हुई जो पूर्व ही निर्धारित थी। स्वयं ईसा जी ने कहा कि मेरी मृत्यु निकट है तथा तुम शिष्यों में से ही एक मुझे विरोधियों को पकड़वाएगा और वो मुझे मार देंगे। इससे सिद्ध है हज़रत ईसा जी ने कोई चमत्कार नहीं किया ये सब पहले से ही निर्धारित था।

KabirparmatmakaprakatDivas

Image
 शिशु रूप में प्रकट कबीर परमेश्वर जी ने 25 दिन तक कुछ नहीं खाया। लेकिन ऐसा स्वस्थ शरीर था जैसे प्रतिदिन 1 किलो दूध पीते हों। 25 दिन की आयु में कबीर साहेब जी ने लीला करके कहा मैं कुंवारी गाय का दूध पीता हूं। कबीर परमात्मा ने शिव जी से कहा कि कुंवारी गाय मंगवाओ, आप गाय पर थपकी मार देना फिर मेरे आशीर्वाद से कुंवारी गाय दूध देगी। नीरू एक बछिया लाया, गाय ने दूध दिया। गरीब, अन ब्यावर कूं दूहत है, दूध दिया तत्काल पीवै बालक ब्रह्मगति, तहां शिव भये दयाल।। 🎊 कबीर साहेब प्राकाट्य ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 1 मंत्र 9 में प्रमाण है, कि पूर्ण परमात्मा अमर पुरुष जब लीला करता हुआ बालक रूप धारण करके स्वयं प्रकट होता है उस समय कुंवारी गाय अपने आप दूध देती है जिससे उस पूर्ण प्रभु की परवरिश होती है। यह लीला केवल कबीर परमात्मा ही करते हैं। 🎊 कबीर परमात्मा का जन्म माँ के गर्भ से नहीं होता। वह स्वयं सतलोक से सशरीर आते हैं अपना तत्वज्ञान देने और मोक्ष प्रदान करने। संत गरीबदास जी की वाणी है - न सतगरु जननी जने, उनके मां न बाप। पिंड ब्रह्मंड से अगम है, जह...

कबीर परमात्मा का प्रकट दिवस मनाते हैं, जयंती नहीं होती

Image
कबीर साहेब का जन्म नहीं होता! आदरणीय गरीब दास जी ने भी अपनी वाणी के माध्यम से यह बताया है कि परमात्मा कबीर जी की कोई माता नही थी अर्थात उनका जन्म माँ के गर्भ से नही हुआ। गरीब, अनंत कोटि ब्रह्मांड में, बंदीछोड़ कहाय।  सो तो एक कबीर हैं, जननी जन्या न माय।।   कबीर परमात्मा सशरीर सतलोक से आते हैं, उनका जन्म नहीं होता। जो देव जन्म मृत्यु के चक्कर में है उनकी जयंती मनाई जाती है लेकिन पूर्ण परमात्मा कबीर जी का प्रकट दिवस मनाया जाता है क्योंकि वो सत्यलोक से सशरीर पृथ्वी पर प्रकट होते हैं - "गगन मंडल से उतरे सतगुरु पुरूष कबीर” जलज माहि पौडन किए, सब पीरन के‌ पीर।। जयंती और प्रकट दिवस में अंतर जानें जो मां के गर्भ से जन्म लेते हैं, उनका जन्म दिवस मनाया जाता है लेकिन पूर्ण परमात्मा कबीर जी का प्रकट दिवस मनाया जाता है क्योंकि वह अविनाशी परमात्मा है। कबीर साहेब का प्रकट दिवस होता है , जयंती नहीं! सन् 1398 (विक्रमी संवत् 1455) ज्येष्ठ मास शुद्धि पूर्णमासी को ब्रह्ममूहूर्त में अपने सत्यलोक से सशरीर आकर परमेश्वर कबीर बालक रूप बनाकर लहरतारा तालाब में कमल के फ...

कबीर साहेब जी का ज्ञान

Image
अद्भुत ज्ञान कबीर परमेश्वर ने ही सतलोक के विषय में बताया कि ऊपर एक ऐसा लोक है जहां सर्व सुख है। वहां कोई कष्ट नहीं है। जिसकी गवाही संत गरीबदास जी ने दी है। गरीब, संखो लहर महर की उपजै, कहर जहां न कोई। दास गरीब अचल अविनाशी, सुख का सागर सोई।।   तीनों देवताओं (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) की वास्तविक स्थिति से परिचित करवाते हुए परमात्मा कबीर जी ने कहा :- तिनके सूत है तीनों देवा, आंधर जीव करत हैं सेवा। कबीर परमात्मा का तत्वज्ञान काल कौन है, कहां रहता है, वह हमें कष्ट क्यों देता है, काल के सभी कार्यों के बारे में परमात्मा कबीर जी ने ही विस्तार से बताया है । सतलोक पृथ्वी लोक से कितनी दूरी पर स्थित है और वहां कैसे जाया जा सकता है। यह जानकारी कबीर परमात्मा जी ने ही दी है ।   तत्वज्ञान कबीर साहेब ने ही हमें अवगत कराया कि हमें जन्म देने व मारने में काल (ब्रह्म) प्रभु का स्वार्थ है जोकि श्रीमद्भागवत गीता अध्याय 11 श्लोक 32 में कहता है कि मैं बढ़ा हुआ काल हूँ अर्जुन। कबीर परमात्मा जी का बताया परम गूढ़ ज्ञान कबीर परमात्मा ने अध्यात्म के बहुत से गूढ़ र...

कबीर परमात्मा की लीलाये

Image
  कबीर साहेब द्वारा की गई अनेकों लीलाओं  🔅 कबीर साहेब द्वारा सर्वानंद को शरण में लेना पंडित सर्वानंद ने अपनी माँ से कहा कि मैंने सभी ऋषियों को शास्त्रार्थ में हरा दिया है तो मेरा नाम सर्वाजीत रख दो लेकिन उनकी माँ ने सर्वानंद से कहा कि पहले आप कबीर साहेब को शास्त्रार्थ में हरा दो तब आपका नाम सर्वाजीत रख दिया जाएगा। जब सर्वानंद कबीर साहेब के पास शास्त्रार्थ करने पहुँचे तो कबीर साहेब ने कहा कि आप तो वेद-शास्त्रों के ज्ञाता हैं मैं आपसे शास्त्रार्थ नहीं कर सकता। तब सर्वानंद ने एक पत्र लिखा कि शास्त्रार्थ में सर्वानंद जीते और कबीर जी हार गए। उस पर कबीर साहेब जी से अंगूठा लगवा लिया। लेकिन जैसे ही सर्वानंद अपनी माँ के पास जाते तो अक्षर बदल कर कबीर जी जीते और पंडित सर्वानंद हार गए ये हो जाते। ये देखकर सर्वानंद आश्चर्य चकित हो गए और आखिर में हार मानकर सर्वानंद ने कबीर साहेब की शरण ग्रहण की। 🔅 सम्मन को पार करना सम्मन बहुत गरीब था। जब कबीर परमात्मा का भक्त बना। तब परमात्मा के आशीर्वाद से दिल्ली का महान धनी व्यक्ति हो गया, परंतु मोक्ष की इच्छा नहीं बनी। सम्मान ने अपने परमेश्...

परमात्मा कबीर परमेस्वर की लीलाये

Image
शिशु कबीर देव द्वारा कुँवारी गाय का दूध पीना’’ जब बालक कबीर को दूध पिलाने की कोशिश में नीरू नीमा असफल रहे। तब कबीर साहेब ने कहा कुँवारी गाय ले आओ मैं उसका दूध पीऊँगा। ऐसा ही हुआ। ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 1 मंत्र 9 में प्रमाण है कि पूर्ण परमात्मा अमर पुरुष जब लीला करता हुआ बालक रूप धारण करके स्वयं प्रकट होता है तब कुँवारी गाय अपने आप दूध देती है जिससे उस पूर्ण प्रभु की परवरिश होती है। शिशु कबीर परमेश्वर का नामांकन" जब कबीर साहेब का नाम रखने के लिए कुरान शरीफ पुस्तक को काज़ी ने खोला। प्रथम नाम ‘‘कबीरन्’’ लिखा था। काजियों ने सोचा इस छोटे जाति वाले का कबीर नाम रखना शोभा नहीं देगा। पुनः कुरान शरीफ खोली तो उसमें सर्व अक्षर कबीर-कबीर-कबीर-कबीर हो गए। कबीर परमेश्वर शिशु रूप में बोले मैं कबीर अल्लाह अर्थात् अल्लाहु अकबर, हूँ। मेरा नाम ‘‘कबीर’’ ही रखो। सकल कुरान कबीर है, हरफ लिखे जो लेख। काशी के काजी कहै, गई दीन की टेक।। शिशु कबीर की सुन्नत करने का असफल प्रयत्न’’ शिशु रूपधारी कबीर देव की सुन्नत करने के लिए जब नाई कैंची लेकर गया तो परमेश्वर ने अपने लिंग के साथ एक लिंग और ब...