KabirparmatmakaprakatDivas

 शिशु रूप में प्रकट कबीर परमेश्वर जी ने 25 दिन तक कुछ नहीं खाया। लेकिन ऐसा स्वस्थ शरीर था जैसे प्रतिदिन 1 किलो दूध पीते हों। 25 दिन की आयु में कबीर साहेब जी ने लीला करके कहा मैं कुंवारी गाय का दूध पीता हूं। कबीर परमात्मा ने शिव जी से कहा कि कुंवारी गाय मंगवाओ, आप गाय पर थपकी मार देना फिर मेरे आशीर्वाद से कुंवारी गाय दूध देगी। नीरू एक बछिया लाया, गाय ने दूध दिया।
गरीब, अन ब्यावर कूं दूहत है, दूध दिया तत्काल
पीवै बालक ब्रह्मगति, तहां शिव भये दयाल।।
🎊कबीर साहेब प्राकाट्य
ऋग्वेद मण्डल 9 सूक्त 1 मंत्र 9 में प्रमाण है, कि पूर्ण परमात्मा अमर पुरुष जब लीला करता हुआ बालक रूप धारण करके स्वयं प्रकट होता है उस समय कुंवारी गाय अपने आप दूध देती है जिससे उस पूर्ण प्रभु की परवरिश होती है।
यह लीला केवल कबीर परमात्मा ही करते हैं।


🎊कबीर परमात्मा का जन्म माँ के गर्भ से नहीं होता। वह स्वयं सतलोक से सशरीर आते हैं अपना तत्वज्ञान देने और मोक्ष प्रदान करने।
संत गरीबदास जी की वाणी है -
न सतगरु जननी जने, उनके मां न बाप।
पिंड ब्रह्मंड से अगम है, जहां न तीनों ताप।।

🎊कबीर परमेश्वर का शरीर हाड़ मांस से बना नहीं है। वह अविनाशी परमात्मा हैं। कबीर परमात्मा जन्म-मृत्यु से परे हैं। वह सशरीर प्रकट हुए थे और सशरीर मगहर से अपने सतलोक गए थे।
हाड चाम लोहू नहीं मोरे, जाने सत्यनाम उपासी।
तारन तरन अभै पद दाता, मैं हूं कबीर अविनासी।।


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