जगन्नाथ मंदिर का रहस्य

क्या आप जानते हैं जगन्नाथ का मंदिर किसने बनवाया?

जगन्नाथ मंदिर जाने से पहले जानें यह रहस्य

समुद्र बार बार जगन्नाथ मंदिर को तोड़ रहा था और विष्णु जी से प्रतिशोध ले रहा था। समुद्र ने कबीर परमात्मा से कहा कि जब यह श्री कृष्ण जी त्रेतायुग में श्री रामचन्द्र रूप में आया था तब इसने मुझे अग्नि बाण दिखा कर बुरा भला कह कर अपमानित
करके रास्ता मांगा था। मैं वह प्रतिशोध लेने जा रहा हूँ।

History of jagannath Yatra god spirituality
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 उड़ीसा में एक इंद्र दमन नाम का राजा था जो श्री कृष्ण जी का पुजारी था उसको स्वपन  में श्री कृष्ण जी ने दर्शन दिए और कहां इंद्र दमन एक मंदिर बनवा दे और जगन्नाथ नाम रख दे और ध्यान रहे उसमें कोई मूर्ति ना हो और उसमें एक विप्र छोड़ देना जो सद ग्रंथों का पाठ करें, कोई पाखंड पूजा मत करना इसमे ।
इंद्र दमन ने पांच बार मंदिर बनवाया लेकिन समुंदर ने तोड़ दिया , फिर छठी बार राजा इंद्र दमन ने अपनी पत्नी के गहनों से मंदिर बनवाया परमात्मा कबीर जी के कहने पर ,पहले चोरा बनवाया जो कबीर मठ के नाम से जाना जाता है परमात्मा कबीर परमेश्वर जी ने समुद्र को रोका।
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रथयात्रा 2020 विशेष
जगन्नाथ मंदिर के पास एक चबूतरा बनवाया गया था जिसे आज कबीर मठ के नाम से जाना जाता है। वहीं पर बैठकर कबीर परमात्मा ने समुद्र को जगन्नाथ मंदिर तोड़ने से बचाया था।
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जगन्नाथ मंदिर रहस्य 
जगन्नाथ मंदिर में मूर्तिपूजा नहीं होती है, मूर्तियां केवल दर्शनार्थ रखी गई हैं। और हिंदुस्तान का जगन्नाथ मंदिर ही एक ऐसा मंदिर है जिसमें किसी भी प्रकार की छुआछात नहीं होती है।


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 पवित्र सतग्रंथों के अनुसार असली जगन्नाथ भगवान कबीर जी ही हैं जिनकी भक्ति करने से हमें पूर्ण मोक्ष मिलेगा।
जगन्नाथ की पूजा करना शास्त्र विरुद्ध साधना है
जगन्नाथ के दर्शन मात्र या खिचड़ी प्रसाद खाने मात्र से कोई लाभ नहीं है क्योंकि यह क्रिया गीता जी में वर्णित न होने से शास्त्र विरुद्ध है जिसका प्रमाण गीता अध्याय 16 मंत्र 23, 24 में है। गीता जी में बताई गई साधना से ही मोक्ष संभव है।

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